अध्याय 98

समर की POV

मैं प्रैक्टिस रूम में ढाई घंटे से थी, जब मुझे पहली बार लगा कि कुछ गड़बड़ है। मिया तो कब की घर जा चुकी थी—परिवार की कोई समस्या थी। उँगलियाँ दुख रही थीं; हथेलियों पर पड़े छाले हर बार कीज़ दबाते ही चुभ उठते। ऊँची-ऊँची खिड़कियों के बाहर, बोस्टन पर नवंबर का आसमान नीचे झुका हुआ था—धूसर, भा...

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